Monday, 21 March 2016
Saturday, 29 August 2015
पधारो हमारे देश
उदयभान मिश्र की यह किताब अभी अभी प्रकाशित हुई.है । यह यात्रा वृतांत्र है । राजस्थान दक्षिण भारत और बिहार की यात्राओ के इसमें विवरण हैं।
Monday, 2 March 2015
poem of udaibhan mishra
,,,,,भीड़ में दौड़ दौड़
.. तुम्हें खोजता रहा।
...सारी राह
तुम्हारे ही बारे में
..सोचता रहा
....रात के सन्नाटे में
जब भी इंजन की
सीटियाँ सुनायी पड़ी
.बिस्तर से उठ उठ कर
अपनी शुभकामनाएं
तुम्हें भेजता रहा
...........................उदयभान मिश्र
.. तुम्हें खोजता रहा।
...सारी राह
तुम्हारे ही बारे में
..सोचता रहा
....रात के सन्नाटे में
जब भी इंजन की
सीटियाँ सुनायी पड़ी
.बिस्तर से उठ उठ कर
अपनी शुभकामनाएं
तुम्हें भेजता रहा
...........................उदयभान मिश्र
Thursday, 1 January 2015
Wednesday, 17 December 2014
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: poem of udaibhan mishra
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: poem of udaibhan mishra: प्रस्थान लंबी बरसात के बाद निकली धूप इससी तुम! लहरा रही हो सरसो के पीले फूलों से भरे खेतों में तुम्हें...
poem of udaibhan mishra
प्रस्थान
लंबी बरसात के बाद
निकली धूप इससी
तुम!
लहरा रही हो
सरसो के पीले फूलों से
भरे खेतों में
तुम्हें पीता जी भर
आँखों से
लौट रहा हूँ
गांव से
शहर की ओर
-उदयभान मिश्र
Thursday, 19 September 2013
एक दिन (poem of udaibhan mishra)
------------ तुन्हारे नगर से
चला जायेगा उदयभान
ए दिन
बिछी की बिछी
रह जायेंगी
गोटिया
देखते रह जायेंगे
साहब
दीवान
और
प्यादे
सजती रहेंगी
कन्याये
विश कन्याये
अप्सराये
मंत्रिगन
विदूशक
कहा लगाओगे
अपने दरबार
कहा रहेगी
यह सभा
कहा रहेगा
यह साम्राज्य
----------------उदयभान मिश्र्
Friday, 13 September 2013
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: उदयभान मिश्र की कविता --------------...
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: उदयभान मिश्र की कविता --------------...: उदयभान मिश्र की कविता --------------------- ओ मेरी पकी टूट्ती दुपहर ओ पीली शाम जरा सोचो तो ...
Saturday, 7 September 2013
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: poem of udaibhan mishra
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: poem of udaibhan mishra: धूप के पंख ------------- बन्द कमरो मे धूप के पंख फड्फडाते है बाहार हवा फूल के गुच्छे हिलाती दरवाजा तोडने को बेताब है -------------...
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: poem of udaibhan mishra
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: poem of udaibhan mishra: धूप के पंख ------------- बन्द कमरो मे धूप के पंख फड्फडाते है बाहार हवा फूल के गुच्छे हिलाती दरवाजा तोडने को बेताब है -------------...
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: poem of udaibhan mishra
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: poem of udaibhan mishra: धूप के पंख ------------- बन्द कमरो मे धूप के पंख फड्फडाते है बाहार हवा फूल के गुच्छे हिलाती दरवाजा तोडने को बेताब है -------------...
poem of udaibhan mishra
धूप के पंख
-------------
बन्द कमरो मे
धूप के पंख
फड्फडाते है
बाहार हवा
फूल के गुच्छे हिलाती
दरवाजा तोडने को
बेताब है
--------------------उदयभान मिश्र
-------------
बन्द कमरो मे
धूप के पंख
फड्फडाते है
बाहार हवा
फूल के गुच्छे हिलाती
दरवाजा तोडने को
बेताब है
--------------------उदयभान मिश्र
Friday, 21 June 2013
poem of udainhan mishra
तिनके जुटाने मे
व्यस्त थी गौरैया
खूटे पर
रम्भाती थी गैया
सहसा तभी
डूब गयी
तैरती नैया
धरती माता
चीख उठी
हा दैया
हा मैया
Friday, 14 June 2013
Sunday, 12 May 2013
Monday, 6 May 2013
प्प्ज्य पिता जी का आशीर्वाद
:
मुझे पिता जी की वे हंसती ऑंखें आज भी याद हैं जिन आँखों ने मुझे गोरखपुर के लिए प्रस्थान करते समय विदायी दी थी . मुझे उस समय पता नहीं था कि पिता जी के साथ इस पृथ्वी पर मेरी यह अंतिम भेंट और अंतिम बातचीत थी . शायद उन्हें इस बात का अहसास था , इसीलिये उस दिन अपने भीतर का सारा प्रेम और आशीर्वाद निचोड़ कर उन्होंने अपनी हंसती आँखों से मुझ पर उड़ेल दिया था .:
-----------मेरी आत्मकथा : : कहानी सिर्फ मेरी ही नहीं से :
Saturday, 9 March 2013
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: poem of udaibhan mishra
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: poem of udaibhan mishra: सदानीरा ------------ वे खोज रहे थे मेरी कविताओं में विद्रोह और तनाव की मुद्राएँ सर्पों के दंश और बिच्छुओं के डंक उ...
poem of udaibhan mishra
सदानीरा
------------
वे खोज रहे थे
मेरी कविताओं में
विद्रोह और तनाव की
मुद्राएँ
सर्पों के दंश
और
बिच्छुओं के डंक
उन्हें कौन समझाए
इन्हें मारने के
बाद ही
जन्म लेती है
एक सदानीरा
कविता
-----------------उदयभान मिश्र
Sunday, 24 February 2013
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: my likings
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: my likings: रामदरश मिश्र हमारे समय के एक महत्वपूर्ण कवि और लेखक हैं . मेरे प्रिय कवि हैं . आज उनकी एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ हाथ ...
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