Thursday, 19 September 2013
एक दिन (poem of udaibhan mishra)
------------ तुन्हारे नगर से
चला जायेगा उदयभान
ए दिन
बिछी की बिछी
रह जायेंगी
गोटिया
देखते रह जायेंगे
साहब
दीवान
और
प्यादे
सजती रहेंगी
कन्याये
विश कन्याये
अप्सराये
मंत्रिगन
विदूशक
कहा लगाओगे
अपने दरबार
कहा रहेगी
यह सभा
कहा रहेगा
यह साम्राज्य
----------------उदयभान मिश्र्
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