Friday, 13 September 2013
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: उदयभान मिश्र की कविता --------------...
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: उदयभान मिश्र की कविता --------------...: उदयभान मिश्र की कविता --------------------- ओ मेरी पकी टूट्ती दुपहर ओ पीली शाम जरा सोचो तो ...
Saturday, 7 September 2013
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: poem of udaibhan mishra
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: poem of udaibhan mishra: धूप के पंख ------------- बन्द कमरो मे धूप के पंख फड्फडाते है बाहार हवा फूल के गुच्छे हिलाती दरवाजा तोडने को बेताब है -------------...
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: poem of udaibhan mishra
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: poem of udaibhan mishra: धूप के पंख ------------- बन्द कमरो मे धूप के पंख फड्फडाते है बाहार हवा फूल के गुच्छे हिलाती दरवाजा तोडने को बेताब है -------------...
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: poem of udaibhan mishra
Udai Bhan Mishra ka Prishtha: poem of udaibhan mishra: धूप के पंख ------------- बन्द कमरो मे धूप के पंख फड्फडाते है बाहार हवा फूल के गुच्छे हिलाती दरवाजा तोडने को बेताब है -------------...
poem of udaibhan mishra
धूप के पंख
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बन्द कमरो मे
धूप के पंख
फड्फडाते है
बाहार हवा
फूल के गुच्छे हिलाती
दरवाजा तोडने को
बेताब है
--------------------उदयभान मिश्र
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बन्द कमरो मे
धूप के पंख
फड्फडाते है
बाहार हवा
फूल के गुच्छे हिलाती
दरवाजा तोडने को
बेताब है
--------------------उदयभान मिश्र
Friday, 21 June 2013
poem of udainhan mishra
तिनके जुटाने मे
व्यस्त थी गौरैया
खूटे पर
रम्भाती थी गैया
सहसा तभी
डूब गयी
तैरती नैया
धरती माता
चीख उठी
हा दैया
हा मैया
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